लघुकथा विराट जीवन का बीज मंत्र है

तेज भागते समय में लघुकथाओं का मंचन कम समय में दर्शकों को सार्थक सन्देश दे सकती हैं

                                                       -अशोक बुलानी

 

भोपाल | लघुकथा विराट जीवन का बीज मंत्र है लघुकथा आकार में भले छोटी हो लेकिन प्रहार में विराट होती है यह उदगार हैं वरिष्ठ लघुकथकार डॉ मालती बसन्त के जो लघुकथा शोध केंद्र भोपाल द्वारा मानस भवन सभागार में आयोजित मासिक लघुकथा पाठ एवम विमर्श के अवसर पर विशिष्ट वक्ता के रूप में बोल रही थी | इस अवसर पर वरिष्ठ नाट्यकर्मी अशोक बुलानी ने कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए कहा कि 'वर्तमान समय शीघ्रता का समय है किसी के पास ठहरने का वक्त नहीं वह कम समय में बहुत कुछ पा लेना चाहता है यह प्रवृत्ति जीवन के हर क्षेत्र में बढ़ती जा रही है ,ऐंसे कठिन दौर में दर्शक एक -दो घण्टे का नाटक भी मुश्किल से देख पाते हैं ऐंसी स्थिति में लघुकथाओं का मंचन दर्शकों को नवीनता के साथ सन्देश दे सकता है ,मैं कुछ चुनिंदा लघुकथाओं का मंचन करना चाहूंगा | इस अवसर पर मुख्यातिथि के रूप में बोलते हुए वरिष्ठ साहित्यकार सन्तोष श्रीवास्तव ने कहा कि-' लघुकथा धैर्य का विषय है इसके लेखन में जल्दबाजी करना ठीक नहीं हमें अपने लिखे को।कुछ समय के लिए छोड़ देना चाहिए लेखन में हर बार सुधार की गुंजाइश रहती है | इस अवसर पर वरिष्ठ रचनाकार विनोद जैन ने कहा कि -'लघुकथा साहित्य में नवीन विधा नहीं है यह हमारे वेदों -पुराणों धार्मिक ग्रन्थों में सूत्र रूप में महतवपूर्ण बात  प्रभावी ढंग से कहने के लिए सदियों से प्रयुक्त होती रही है | इस अवसर पर लघुकथकार सरिता बघेला ने स्त्री शसक्तीकरण पर केंद्रित लघुकथा 'अपने लिए खुशी ' का वाचन किया इस क्रम को आगे बढ़ाते हुए श्रीमती मधुलिका श्रीवास्तव ने बुजुर्गों की मनोदशा के ताने-बाने को लेकर 'चाहत' लघुकथा का पाठ किया | श्रीमती मनोरमा पंत की पर्यावरण को समर्पित 'हुजूम' लघुकथा श्रोताओं को बहुत पसंद आई | इस अवसर पर श्रीमती उषा सोनी ने 'उजास' और 'उचित' समसामयिक पारिवारिक मुद्दों पर सशक्त लघुकथाएं प्रस्तुत की | इन लघुकथाओं पर वरिष्ठ साहित्यकार डॉ गिरजेश सक्सेना ,सतीशचंद श्रीवास्तव किरण खोड़के,विपिनबिहारी वाजपेई ,अशोक धमेनिया डॉ हिदायत अहमद खान ,एस के दीवान ने अपनी महत्वपूर्ण समीक्षात्मक टिप्पणियां की कार्यक्रम में सर्वप्रथम शोध केंद्र की निदेशक कांता राय ने स्वागत उदबोधन देते हुए आयोजन की रूपरेखा पर विस्तार से प्रकाश डाला | कार्यक्रम का संचालन घनश्याम मैथिल'अमृत' ने किया और अंत में आभार प्रदर्शन जया केतकी ने किया |

 


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